जिला प्रशासन के निरंतर प्रयासों से मिली बड़ी सफलता

दमोह 03 जनवरी /दमोह जिले के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के जबलपुर सर्कल के अंतर्गत दमोह में एक नए सब-सर्कल कार्यालय की स्थापना की जा रही है। यह कार्यालय शहर की एक प्राचीन इमारत में संचालित होगा, जिसे स्थानीय लोग पहले गिरजाघर के नाम से जानते थे।
यह सफलता जिला प्रशासन द्वारा लगातार किए गए पत्राचार और प्रयासों का परिणाम है।
स्मारकों के संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती
कलेक्टर श्री सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि यह सब-सर्कल कार्यालय दमोह तथा आसपास के क्षेत्रों में स्थित संरक्षित ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण, देखरेख और रखरखाव के कार्यों के लिए उत्तरदायी रहेगा।
कार्यालय में कंज़र्वेशन असिस्टेंट सहित अन्य सहयोगी स्टाफ की तैनाती की जाएगी, जो स्मारकों की मरम्मत, संरक्षण और नियमित निरीक्षण का कार्य करेंगे।
क्षेत्रीय संरक्षण व्यवस्था होगी सशक्त
गौरतलब है कि अभी तक जबलपुर सर्कल के अंतर्गत सागर, जबलपुर, रीवा और खजुराहो में सब-सर्कल कार्यालय कार्यरत हैं। अब दमोह में नए सब-सर्कल की स्थापना से बुंदेलखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
15 फरवरी के बाद संचालन की संभावना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्यालय 15 फरवरी के बाद प्रारंभ होने की संभावना है। वर्तमान में चयनित भवन में मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण का कार्य तेज़ी से जारी है, जिसमें—
- छत की वाटरप्रूफिंग
- ग्रिल एवं जाली निर्माण
- मैदान का समतलीकरण
- बगीचे का विकास
- लाइट फिटिंग
- रंगाई-पुताई
जैसे कार्य शामिल हैं।
निष्कर्ष
ASI सब-सर्कल कार्यालय की स्थापना से दमोह की ऐतिहासिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहरों का संरक्षण अधिक व्यवस्थित रूप में संभव हो सकेगा
