भोपाल।राजधानी भोपाल में आयुष्मान भारत निरामयम योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही आर्थिक अनियमितताओं पर स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। गंभीर गड़बड़ियों के आरोपों के बाद भोपाल के पांच निजी अस्पतालों को योजना से निलंबित कर दिया गया है। इन अस्पतालों को सात दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर संबंधित अस्पतालों को योजना की सूची से स्थायी रूप से बाहर कर दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निजी अस्पतालों द्वारा बार-बार की जा रही गड़बड़ियों के पीछे विभागीय निगरानी में कमी और पूर्व में अपनाया गया नरम रवैया भी एक बड़ा कारण रहा है। यही वजह है कि अब विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
पोर्टल बंद होने से बढ़ी पारदर्शिता की कमी
बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा वह ऑनलाइन पोर्टल बंद कर दिया गया है, जिस पर निजी अस्पतालों से जुड़ी विस्तृत जानकारी उपलब्ध रहती थी। इस पोर्टल पर अस्पताल संचालक का नाम, स्थायी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सूची, उपचार दरें और उपलब्ध सुविधाओं का विवरण दर्ज होता था। पोर्टल के बंद होने से आमजन को अस्पतालों की वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं मिल पा रही है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आयुष्मान वेबसाइट पर भी अधूरी जानकारी
स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल के अलावा आयुष्मान भारत निरामयम योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जानकारी अधूरी बताई जा रही है। वेबसाइट पर योजना से जुड़े अस्पतालों के नाम तो दर्ज हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किस अस्पताल में किन बीमारियों का उपचार योजना के तहत किया जाएगा। इसका सीधा नुकसान मरीजों को उठाना पड़ता है। कई मामलों में अस्पताल इलाज को योजना में शामिल न होने का हवाला देकर मरीजों से नकद राशि वसूल लेते हैं।
2023 में सामने आया था बड़ा घोटाला
आयुष्मान योजना में अनियमितताओं का मामला पहली बार वर्ष 2023 में उजागर हुआ था। उस समय तीन वर्षों में निजी अस्पतालों को किए गए भुगतान में करीब 200 करोड़ रुपए की गड़बड़ी सामने आई थी। जांच के बाद राज्य आयुष्मान कार्यालय ने 120 निजी अस्पतालों को योजना से बाहर कर दिया था। हालांकि समय बीतने के साथ इनमें से कई अस्पताल नाम बदलकर दोबारा सूचीबद्ध हो गए, जिसने व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए।
फर्जीवाड़ा रोकने के लिए तकनीकी निगरानी
इसी बीच यह भी उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश आयुष्मान भारत निरामयम कार्यालय को हाल ही में फर्जीवाड़ा नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ है। विभाग द्वारा विकसित विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से अब इलाज के नाम पर की जाने वाली धांधली, फर्जी भर्ती और अनियमित बिलिंग को तुरंत चिन्हित किया जा रहा है।
एक सप्ताह में जवाब, फिर कड़ी कार्रवाई
आयुष्मान मप्र कार्यालय के अनुसार, हाल ही में निलंबित किए गए पांचों अस्पतालों को एक सप्ताह का समय दिया गया है। निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में इन अस्पतालों को डि-इम्पैनल्ड कर दिया जाएगा, जिससे वे आयुष्मान योजना के अंतर्गत मरीजों का इलाज नहीं कर सकेंगे। विभाग का दावा है कि योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।
