दमोह। नगर की उमा मिस्त्री की तलैया में सकल जैन समाज द्वारा नन्हे मंदिर के नवीन निर्माण कार्य हेतु आयोजित श्री अरिहंत चक्र 24 समवशरण महामंडल विधान का मंगलवार को विमान उत्सव एवं श्रीजी की पालकी यात्रा के साथ श्रद्धापूर्वक समापन हुआ। पूरे आयोजन में धर्म, आस्था और भक्ति का वातावरण छाया रहा।कार्यक्रम के अंतिम दिवस प्रातः बेला में श्रीजी के अभिषेक के उपरांत 64 रिद्धि शांति धाराएं एवं विश्व शांति महायज्ञ संपन्न हुआ। यह आयोजन आचार्य विद्यासागर एवं आचार्य समयसागर की मंगल प्रेरणा एवं आशीर्वाद से, उनके शिष्य मुनि पदम सागर एवं छुल्लक तात्पर्य सागर के सानिध्य में संपन्न हुआ।मुनि संघ के मार्गदर्शन में प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी दीपक भैया, सुरेश शास्त्री, अभिषेक शास्त्री, रोहित भैया, मोनू भैया, स्वतंत्र भैया आदि के निर्देशन में नित्य पूजन, नवदेवता पूजन, आचार्य पूजन एवं जिनवाणी पूजन विधिपूर्वक सम्पन्न हुआ। इसके पश्चात विश्व शांति की कामना से हवन-यज्ञ आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुनिश्री पदम सागर जी महाराज की दिव्य देशना का लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
विमान उत्सव और पालकी यात्रा आकर्षण का केंद्र
दोपहर में विमान उत्सव के साथ श्रीजी की पालकी यात्रा कार्यक्रम स्थल से प्रारंभ हुई। समोशरण का मुख्य कलश प्राप्त करने का सौभाग्य मीनू जैन विजय श्री आयरन परिवार को मिला। अन्य दिशाओं के कलश प्राप्त करने का सौभाग्य सौधर्म इंद्र प्रिंस जैन अभाना परिवार, महेश दिगंबर परिवार, यज्ञ नायक प्रवीण महावीर जैन परिवहन परिवार एवं रमेश चौधरी टोपीवाला परिवार को प्राप्त हुआ।एक प्रतिमा जी का सौभाग्य ब्रह्मचारी विनय भैया एवं श्रीमती संगीता जैन परिवार को प्राप्त हुआ। मंडप निर्माण हेतु मुन्नालाल माधव प्रसाद खमरिया परिवार द्वारा घोषणा की गई।मुंगावली से आए युवाओं का दिव्य घोष यात्रा का विशेष आकर्षण रहा। 20 से अधिक मंडलों एवं प्रमुख महिला मंडलों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई। धर्म ध्वजाओं के साथ बालक-बालिकाएं, श्रावक-श्राविकाएं भक्ति में सराबोर दिखाई दिए।
नगर भ्रमण कर नन्हे मंदिर परिसर में समापन
मुनि श्री पदम सागर जी एवं छुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने श्रीजी की पालकी को कंधों पर उठाकर भक्ति भाव से नगर भ्रमण कराया। यात्रा नया बाजार, घंटाघर, स्टेशन चौराहा, बस स्टैंड चौराहा से होते हुए पुनः घंटाघर मार्ग से पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर नन्हे मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न हुई।मंदिर परिसर में पुनः अभिषेक, पूजन एवं शांति धारा सम्पन्न हुई तथा मुनि श्री पदम सागर महाराज के मंगल प्रवचनों का लाभ श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया।भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद सैकड़ों की संख्या में सकल जैन समाज के महिला-पुरुष एवं बच्चे पूरे आयोजन में शामिल रहे। यह आयोजन नगर में धर्म, एकता और श्रद्धा का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।
