20 से 22 फरवरी तक चला सर्वे, सात प्रजातियाँ दर्ज; भारतीय गिद्ध सर्वाधिक
दमोह ,28 फरवरी /मध्य प्रदेश वन विभाग के निर्देशानुसार वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 20 फरवरी से 22 फरवरी 2026 तक गिद्धों की विस्तृत गणना (वॉल्चर सेंसेस) संपन्न की गई। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों की वास्तविक संख्या, उनकी प्रजातिगत विविधता तथा निवास स्थलों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना था, ताकि संरक्षण रणनीतियों को और प्रभावी बनाया जा सके।
तीन दिनों के आंकड़े
वन मंडल द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार—
- 20 फरवरी को 951 गिद्ध दर्ज किए गए।
- 21 फरवरी को 741 गिद्धों की गणना हुई।
- 22 फरवरी को 844 गिद्धों की उपस्थिति दर्ज की गई।
अधिकारियों ने बताया कि प्रतिदिन की गणना अलग-अलग निर्धारित बीट एवं वॉच प्वाइंट्स पर की गई। सुबह और शाम के समय विशेष निगरानी रखी गई, जब गिद्ध भोजन एवं विश्राम स्थलों पर अधिक संख्या में दिखाई देते हैं।
सात प्रजातियों की पुष्टि
वर्ष 2026 के सर्वेक्षण में कुल सात प्रजातियाँ चिन्हित की गईं—
- भारतीय गिद्ध (लॉन्ग बिल्ड गिद्ध) – सर्वाधिक संख्या
- व्हाइट रंप्ड गिद्ध – दूसरे स्थान पर
- इजिप्शियन गिद्ध – मध्यम संख्या
- लाल सिर वाला गिद्ध – सीमित संख्या
- यूरेशियन ग्रिफॉन – प्रवासी
- हिमालयन ग्रिफॉन – प्रवासी
- सिनेरियस गिद्ध – प्रवासी
विशेषज्ञों के अनुसार प्रवासी गिद्धों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि टाइगर रिजर्व का पारिस्थितिक तंत्र सुरक्षित और अनुकूल है। यह क्षेत्र उनके लिए सुरक्षित आवास और भोजन की उपलब्धता प्रदान करता है।
संरक्षण की दृष्टि से महत्व
गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के “प्राकृतिक सफाईकर्मी” माने जाते हैं। मृत पशुओं को शीघ्रता से नष्ट कर वे संक्रामक रोगों के फैलाव को रोकते हैं। विगत वर्षों में दवाओं के दुष्प्रभाव और आवास विनाश के कारण गिद्धों की संख्या में गिरावट देखी गई थी, लेकिन वर्तमान सर्वे के आंकड़े संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम का संकेत देते हैं।
वन विभाग द्वारा बताया गया कि—
- गिद्धों के सुरक्षित घोंसले स्थलों की पहचान की जा रही है।
- डिक्लोफेनाक जैसी हानिकारक पशु दवाओं के उपयोग पर निगरानी रखी जा रही है।
- स्थानीय ग्रामीणों में जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
आगे की रणनीति
वन विभाग नियमित मॉनिटरिंग, वैज्ञानिक अध्ययन एवं संरक्षण कार्यक्रमों को जारी रखेगा। साथ ही, रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों के अनुकूल पर्यावरण बनाए रखने के लिए वन्यजीव संरक्षण नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।गिद्धों की सात प्रजातियों की एक साथ उपस्थिति वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को प्रदेश के महत्वपूर्ण गिद्ध आवास क्षेत्रों में स्थापित करती है।
