इंदौर,07 March/लोक अभियोजन मध्य प्रदेश, भोपाल के तत्वाधान में तथा संचालक लोक अभियोजन मध्य प्रदेश श्री बी.एल. प्रजापति (न्यायिक सेवा) के मार्गदर्शन में इंदौर संभाग के अभियोजन अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से एक दिवसीय संभागीय कार्यशाला का आयोजन इंदौर स्थित होटल राजशाही, ढक्कनवाला कुआं में प्रातः 9 बजे से सायं 4 बजे तक किया गया। कार्यशाला का आयोजन प्रभारी उपनिदेशक अभियोजन जिला इंदौर श्री राजेंद्र सिंह भदौरिया के कुशल नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति वी.एस. कोकजे ने किया। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज इंदौर के ओबीजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुमित्रा यादव भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ की गई।सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी इंदौर अभिषेक जैन ने बताया कि अभियोजन अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य रूप से पॉक्सो अधिनियम 2012 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में सहायक निदेशक अभियोजन आर.एस. भदौरिया ने स्वागत भाषण दिया। इसके पश्चात मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री वी.एस. कोकजे ने आपराधिक न्याय प्रणाली में अभियोजन की भूमिका विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अभियोजन अधिकारियों को न्यायालय में शासन का पक्ष एक सक्षम अधिवक्ता की तरह मजबूती से रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय ने भी अभियोजन अधिकारियों की भूमिका को न्याय प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय करने का दायित्व केवल न्यायालय का ही नहीं बल्कि अभियोजन और पुलिस की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कार्यक्रम में वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. सुमित्रा यादव ने पॉक्सो एक्ट से जुड़े अपराधों में मेडिकल साक्ष्यों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पीड़ितों को सबसे पहले उचित काउंसलिंग की आवश्यकता होती है तथा समय पर मेडिकल परीक्षण कराया जाना बेहद आवश्यक है। इससे घटना की वास्तविक स्थिति मेडिकल साक्ष्यों के माध्यम से स्पष्ट हो पाती है और कई मामलों में इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय आरोपी को दोषी ठहराता है।
कार्यशाला में माननीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश महू श्री भरत कुमार व्यास ने पॉक्सो एक्ट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संग्रहण एवं उनके प्रस्तुतीकरण विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट एक विशेष कानून है, जिसमें पीड़ित की आयु अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए पीड़ित की आयु प्रमाणित करने के लिए किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार न्यायालय में दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में यह साक्ष्य न्याय प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए अभियोजन अधिकारियों को इनके प्रति सजग और अद्यतन रहना चाहिए।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में महिला सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता मध्यप्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग इंदौर की विधि अधिकारी श्रीमती अनीता शुक्ला ने की। उन्होंने वर्तमान समय में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और समाज में उनके योगदान पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मध्यप्रदेश शासन की संचालक श्रीमती नमिता तिवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश को बाल मजदूरी और बंधुआ मजदूरी से पूर्णतः मुक्त बनाना हमारा लक्ष्य है। इसके लिए शासन के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बाल मजदूरी से मुक्त कराए गए बच्चों के लिए शासन द्वारा उनके रहने, खाने और शिक्षा की समुचित व्यवस्था की जा रही है।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं माननीय उच्चतम न्यायालय की ए.ओ.आर. कीर्ति पटवर्धन भी शामिल हुईं और उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम की शुरुआत एडीपीओ वर्षा पाठक द्वारा ईश्वर स्तुति प्रार्थना से की गई। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर की कवयित्री शिवांगी प्रेरणा ने महिलाओं के सम्मान में काव्य पाठ प्रस्तुत कर कार्यक्रम में समां बांध दिया।कार्यशाला के समापन सत्र में सभी सहभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में स्वागत भाषण श्री राजेंद्र सिंह भदौरिया द्वारा दिया गया तथा सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी इंदौर श्रीमती सुशीला राठौर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री ज्योति आर्य और श्री गोकुल सिंह सिसोदिया, सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी इंदौर द्वारा किया गया।
