श्रीराम के जीवंत जीवन-वृत्तांत से त्रेतायुग की दिव्य कथा का साक्षी बना नोहटा

दमोह | 14 फरवरी /संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी के मार्गदर्शन तथा महोत्सव संयोजक सत्येंद्र सिंह के नेतृत्व में नोहटा धाम में आयोजित नोहलेश्वर महोत्सव 2026 का आठवां दिवस भक्ति, संस्कृति और शिक्षा-सेवा के अद्भुत समन्वय का प्रतीक बना। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीगणेश की विधिवत पूजा-अर्चना एवं चरण वंदना से हुआ, जिसके पश्चात भव्य सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजनों की श्रृंखला प्रारंभ हुई।
रामायण का जीवंत मंचन, दर्शक मंत्रमुग्ध
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रहे देश के सुप्रसिद्ध अभिनेता पुनीत इस्सर, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट आयाम दिया। लगभग 150 कलाकारों की विशाल टीम ने मंच पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन का अत्यंत प्रभावशाली और सजीव चित्रण प्रस्तुत किया।भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर वनवास, रावण वध और अयोध्या आगमन तक की प्रमुख घटनाओं का मंचन भावपूर्ण शैली में किया गया। भव्य वेशभूषा, सजीव संवाद और आकर्षक मंच सज्जा ने दर्शकों को मानो त्रेतायुग में पहुंचा दिया। पुनीत इस्सर के निर्देशन और प्रभावशाली अभिनय ने प्रस्तुति में चार चाँद लगा दिए और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा।
‘समग्र विकास’ का मंच बना महोत्सव
राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि नोहलेश्वर महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समग्र विकास की सशक्त पहल है, जहां भक्ति के साथ शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि क्षेत्र का प्रत्येक बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़कर आत्मनिर्भर और सक्षम नागरिक बने। नवोदय कोचिंग, स्मार्ट क्लासेस और नि:शुल्क पुस्तकालय जैसी पहलें समाज परिवर्तन के मजबूत स्तंभ हैं। ‘विकसित क्षेत्र – सशक्त युवा’ के संकल्प के साथ हम नोहटा धाम को एक आदर्श आध्यात्मिक, शैक्षणिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में यह महोत्सव प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाएगा और यहां से सेवा, संस्कार एवं समर्पण की प्रेरणा पूरे देश में पहुंचेगी।
शिक्षकों का सम्मान, शिक्षा विस्तार का संकल्प
महोत्सव संयोजक सत्येंद्र सिंह ने बताया कि मंच से सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता दी गई। कृष्णभाव फाउंडेशन के तत्वावधान में संचालित नि:शुल्क नवोदय कोचिंग में सेवाएं दे रहे शिक्षकों एवं सहयोगी पालकों का सम्मान किया गया।
सत्र 2024-25 में जहां 13 स्थानों पर कक्षाएं संचालित हो रही थीं, वहीं सत्र 2025-26 में इसे बढ़ाकर 36 स्थानों तक पहुंचा दिया गया है। लक्ष्य है कि भविष्य में 100 से अधिक नि:शुल्क कक्षाओं का संचालन कर प्रत्येक जरूरतमंद विद्यार्थी तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाई जाए।
तेंदूखेड़ा में “विद्या समय” नामक नि:शुल्क पुस्तकालय प्रारंभ किया गया है, वहीं शीघ्र ही जबेरा में भी पुस्तकालय प्रारंभ करने की घोषणा की गई। स्मार्ट क्लासेस के माध्यम से छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कराई जा रही है।
भक्ति, अनुशासन और सामाजिक प्रतिबद्धता का संगम
पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अद्भुत संगम देखने को मिला। नोहलेश्वर महोत्सव का यह दिवस सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध होने के साथ-साथ शिक्षा और सेवा के संदेश से समाज को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
नोहटा धाम एक बार फिर भक्ति, परंपरा और सामाजिक प्रतिबद्धता के प्रेरणादायी केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया।
