गली गली में जन के सामने जल की जांच,कार्यशाला का आयोजन
डा.एल.एन.वैष्णव
दमोह,06 जनवरी/सावधानी हटी कि दुर्घटना घटी हमारा लक्ष्य और संकल्प यह होना चाहिये कि कोई दुर्घटना न घटे कोई भी नागरिक दूषित पानी के सेवन से न मरे इसके लिये सजगता और सर्तकता आवश्यक है यह बात दमोह के कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने कही। आज 6 जनवरी मंगलवार को स्थानीय शासकीय पीएमश्री महाविघालय पीजी कालेज दमोह में आयोजित कार्यशाला के दौरान कलेक्टर कोचर ने उपस्थित लोेगों को संबोधित करते हुये कहा कि हमने संकल्प लिया है कि जनता के सामने ही जल के संेपल लेकर जांच की जायेगी। यह जनता को भी जानने और समझने का अधिकार है कि किस प्रकार पानी की जांच की जाती है और जो पानी वह पी रहे हैं वह कितना स्वच्छ है। उन्होने कहा कि हमारी यह आदत बन गयी है कि हादसांे से सीखते हैं जबकि हादसे न होें इस पर विचार करे हुये कार्य करना चाहिये। जान जाने का दर्द तब मालूम पडता है जब कोई अपना मरता है इसलिये सजगता और सर्तकता दोना आवश्यक है। उन्होने नमक और प्रशासन का उल्लेख करते हुये महत्व बताया कि जब भोजन में नमक बराबर होता है तो नमक का महत्व समझमें नही आता जब कम या ज्यादा हो जाता है तो हम उसकी चर्चा में लग जाते हैं। कलेक्टर कोचर ने कहा कि प्रशासन हमे उस प्रकार चलाना है जिस प्रकार भोजन में नमक मिलता है। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने कहा, हाल ही में घटित एक घटना को दृष्टिगत रखते हुए जिले में इस प्रकार की किसी भी अप्रिय स्थिति की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। इसी क्रम में न केवल आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, बल्कि उन पर प्रभावी रूप से अमल भी प्रारंभ कर दिया गया है।
कलेक्टर कोचर ने कहा, आज सुबह स्वयं अधिकारियों के साथ विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर जल स्त्रोतों एवं पानी की टंकियों का निरीक्षण किया गया। जिन स्थानों पर पेयजल के दूषित होने की आशंका है, उन्हें ट्रैक कर नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। आज यहॉ नगरीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के अधिकारियों, नगरपालिका अमले, पीएचई तथा ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया। उन्होने कहा, प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीएचई विभाग के विशेषज्ञों द्वारा जल प्रदूषण की जांच की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें पानी में बैक्टीरिया की उपस्थिति, जल की कठोरता सहित अन्य तकनीकी परीक्षणों की विधियों पर पूरा ओरिएंटेशन दिया गया। इसके पश्चात अब ग्राम पंचायत स्तर पर भी प्रशिक्षित टीमों को सक्रिय किया जा रहा है, जो जल परीक्षण के कार्य में दक्ष होंगी। पूरा तंत्र अब व्यवस्थित रूप से कार्य करेगा, ताकि गंदे पानी से फैलने वाली किसी भी बीमारी को रोका जा सके और आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
लोग करें शिकायत तो समाधान नंबर जारी-
पेयजल से संबंधित शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए दमोह हेल्पलाइन नंबर 07812-350300 तथा सीएम हेल्पलाइन 180 को सक्रिय किया गया है। ग्रामीण या नगरीय क्षेत्र में यदि कहीं भी दूषित, गंदा या मटमैला पानी आने की शिकायत होती है, तो नागरिक तत्काल सूचना दे सकते हैं। शिकायत प्राप्त होते ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर पानी की जांच सुनिश्चित करेगी, ताकि किसी भी नागरिक को दूषित पानी के उपयोग की स्थिति का सामना न करना पड़े।
इन्होने भी किया संबोधित रखे विचार-
जिला पंचायत सीईओ प्रवीण फुलपगारे ने कहा कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के निर्देश पर इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर वर्कशॉप को आयोजित किया, मुख्य उद्देश्य है कि इस विषय पर जागरूकता फैलाना और पानी की गंदगी को लोगों के जहन में लाना उनको इससे अवगत कराना ताकि वो समझें कि शुद्ध और स्वच्छ पेयजल हमारे स्वास्थ्य के लिए, हमारे परिवार के लिए कितना महत्वपूर्ण है। उन्होने बताया न तो आप पानी के अंदर क्लोरीन को देख सकते हो और न ही आप पानी के अंदर कीटाणु और वायरस को देख सकते हो। जब नहीं देख सकते तो हमारे पास किट है और हमारी जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, उनका बहुत बड़ा ग्रामीण क्षेत्र में दायित्व है। कम से कम आप वीकली आपके पानी सप्लाई का जो सोर्स हैं, उसकी जांच जरूर करें। कार्यपालन यंत्री पीएचई मुकाती ने कहा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा जिले में पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में जिले में तीन प्रयोगशालाएं संचालित हैं। इन तीनों प्रयोगशालाओं में कहीं से भी हमारे पास में सैंपल आता है, तो उसकी टेस्टिंग करके हम लोग रिपोर्ट प्रदर्शित करते हैं और अगर कहीं लगता है कि सैंपल हमारा या पानी हमारा उपयोगी नहीं है, तो उसके लिए आवश्यक कार्रवाई करते हैं, जैसे क्लोरीन डालना या ब्लीचिंग पाउडर डालना इस तरीके से पानी को शुद्ध बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करते हैं।
जल निगम महाप्रबंधक गौरव सराफ ने कहा, यह कार्यशाला पेयजल की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए जो टेस्टिंग की जानी चाहिए फील्ड लेवल पर उसको कैसे मॉनिटर किया जाए या उसको कैसे प्रभावशील बनाकर रखा जाए और किन-किन विभागों की जिम्मेदारी किस स्तर पर सुनिश्चित कराई जाए, ताकि भविष्य में कोई गंभीर घटना दूषित पेयजल पीने से फैलने की, कोई भी घटना दमोह जिले में आगामी किसी भी समय नहीं हो, इसको सुनिश्चित करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. प्रहलाद पटेल ने कहा, स्वच्छ जल के संबंध में कार्यशाला आयोजित की गई थी, जिससें कि भविष्य में दूषित पेयजल पीने से कोई गंभीर घटना न हो। मुख्य नगर पालिका अधीकारी राजेन्द्र सिंह लोधी ने कहा, पेयजल की गुणवत्ता और टेस्टिंग के संबंध में कार्यशाला आयोजित की गयी थी। उन्होने बताया पेयजल के संबंध में किस तरह से परीक्षण किया जाता है के संबंध मे विस्तार से तकनीकी विशेषज्ञो के द्वारा जानकारियॉ दी गई।
