लोकतंत्र सेनानियों के अनुभव, युवाओं के प्रश्न और ऐतिहासिक समीक्षा पर होगा व्यापक विमर्श
भोपाल,16 Feb/ बहुभाषी न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार द्वारा 19 फरवरी 2026, गुरुवार को दोपहर 2:00 बजे से सेम ग्लोबल यूनिवर्सिटी, रायसेन रोड, भोपाल में “इमरजेंसी के 50 साल: आपातकाल और युवा” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। आपातकाल (1975-77) की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम लोकतांत्रिक इतिहास के उस महत्वपूर्ण कालखंड की समीक्षा तथा नई पीढ़ी को उससे जोड़ने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
आपातकाल: लोकतांत्रिक मूल्यों की परीक्षा
कार्यक्रम में वर्ष 1975 से 1977 के बीच लागू आपातकाल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके राजनीतिक एवं सामाजिक प्रभावों तथा नागरिक अधिकारों पर पड़े असर पर विस्तृत चर्चा होगी। उस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की आज़ादी, राजनीतिक गतिविधियों और नागरिक अधिकारों पर लगाए गए प्रतिबंधों का समाज और विशेष रूप से युवाओं पर क्या प्रभाव पड़ा, इस पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
लोकतंत्र सेनानियों के अनुभवों से संवाद
संगोष्ठी में उन व्यक्तियों के अनुभव भी साझा किए जाएंगे, जो आपातकाल के दौरान आंदोलन, गिरफ्तारी और जेल यात्राओं से जुड़े रहे और जिन्हें आज “लोकतंत्र सेनानी” के रूप में जाना जाता है।
वे अपने व्यक्तिगत संस्मरणों के माध्यम से बताएंगे कि किस प्रकार उस समय के संघर्षों ने भारतीय लोकतंत्र की दिशा और नागरिक चेतना को प्रभावित किया। कार्यक्रम में यह भी बताया जाएगा कि लोकतंत्र सेनानियों को विभिन्न राज्यों में किस प्रकार मान्यता और सम्मान प्रदान किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और मूल्यों की परीक्षा का कालखंड था।
युवा पीढ़ी की भूमिका पर विशेष फोकस
कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु “युवा” हैं। संगोष्ठी में इस बात पर विमर्श होगा कि वर्तमान युवा पीढ़ी आपातकाल जैसे ऐतिहासिक प्रसंगों से क्या सीख ले सकती है और लोकतंत्र की रक्षा में उसकी क्या भूमिका हो सकती है।
चर्चा के प्रमुख विषय—
- लोकतंत्र की रक्षा में युवाओं की सक्रिय भूमिका
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व
- संविधान और नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूकता
- राजनीतिक चेतना और जिम्मेदार नागरिकता
वक्ताओं द्वारा इन बिंदुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े वक्ता अपने विचार व्यक्त करेंगे। वे आपातकाल की पृष्ठभूमि, उसके प्रभाव और वर्तमान संदर्भ में लोकतांत्रिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालेंगे।
उद्देश्य: इतिहास से सीख, भविष्य की दिशा
आयोजकों के अनुसार इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य केवल अतीत को स्मरण करना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य के लिए लोकतांत्रिक चेतना को सुदृढ़ करना है। युवाओं को यह समझाना आवश्यक है कि लोकतंत्र केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि निरंतर जागरूकता, सहभागिता और उत्तरदायित्व की प्रक्रिया है।
यह आयोजन लोकतांत्रिक विमर्श और ऐतिहासिक पुनरावलोकन का महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है, जहां अतीत के अनुभव और वर्तमान की जिम्मेदारियां एक साथ सामने आएंगी।
