फर्जी प्रमाण पत्र पर कड़े दंड का प्रावधान, लाभ वितरण से पूर्व होगी जांच
दमोह | 23 फरवरी /राज्य शासन द्वारा यूडीआईडी कार्ड एवं दिव्यांगता प्रमाण पत्र की सत्यता के अभिप्रमाणन तथा शासकीय योजनाओं के लाभ वितरण से पूर्व अनिवार्य सत्यापन के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। यह निर्णय विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त फर्जी, नकली अथवा गलत प्रतिशत के दिव्यांग प्रमाण पत्रों की शिकायतों के परिप्रेक्ष्य में लिया गया है।उपसंचालक सामाजिक न्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अंतर्गत कठोर दंडात्मक प्रावधान लागू हैं—
🔹 धारा 89
फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर योजना का लाभ लेने पर
- प्रथम उल्लंघन पर अधिकतम 10,000 रुपये तक का दंड
- पुनरावृत्ति पर 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक का दंड
🔹 धारा 91
फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर लाभ प्राप्त करने वाले को
- अधिकतम 2 वर्ष तक का कारावास
या - 1 लाख रुपये तक का जुर्माना
या - दोनों से दंडित किया जा सकेगा
अनिवार्य डिजिटल सत्यापन
जिले में लाभ प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत सभी यूडीआईडी कार्ड एवं दिव्यांगता प्रमाण पत्रों का लाभ प्रदाय से पूर्व यूडीआईडी पोर्टल के माध्यम से डिजिटल अभिप्रमाणन किया जाना अनिवार्य होगा।
- पुराने मैनुअल प्रमाण पत्रों को यूडीआईडी पोर्टल पर डिजिटाइज कराना आवश्यक होगा।
- शासकीय नियुक्ति, शिक्षण संस्थान में प्रवेश, छात्रवृत्ति, पेंशन, साधन सहायता, परिवहन सुविधा आदि किसी भी लाभ से पूर्व प्रमाण पत्र की वैधता सुनिश्चित की जाएगी।
- आवश्यक होने पर संबंधित चिकित्सा संस्था या मेडिकल बोर्ड से पुनः सत्यापन कराया जाएगा।
- संदेहास्पद मामलों की सूचना एससीपीडी/सीसीपीडी कार्यालय को तत्काल भेजी जाएगी।
भारत सरकार द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को जारी एसओपी के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सीय परीक्षण भी कराए जा सकेंगे। आवेदक को अपील का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। जिले के सभी विभागों, तहसीलों, पेंशन कार्यालय, शैक्षणिक संस्थानों, रोजगार कार्यालय एवं परिवहन विभाग को निर्देशित किया गया है कि सत्यापन प्रक्रिया के अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं तथा सत्यापित एवं संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट नियमानुसार प्रेषित की जाए।प्रशासन के अनुसार यह व्यवस्था दिव्यांगजनों के वास्तविक हितों की रक्षा करते हुए लाभ वितरण की शुचिता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।
