(डॉ. एल.एन. वैष्णव)
भोपाल। मध्य प्रदेश का जेल विभाग महिला कैदियों के सुधार और पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। विभाग ने प्रदेश की खुली जेलों में महिला कैदियों को रखने के लिए जेल नियमावली (जेल मैन्युअल) में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही पात्र महिला कैदियों को भी खुले कारागार में स्थानांतरित किया जा सकेगा।यह निर्णय लागू होने पर महाराष्ट्र और राजस्थान के बाद मध्य प्रदेश देश का तीसरा राज्य बन जाएगा, जहाँ महिला कैदियों को भी खुली जेलों में रहने का अवसर मिलेगा।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
अब तक प्रदेश की 6 खुली जेलों में केवल पुरुष कैदियों को ही रखा जाता था। महिला कैदियों को जिला या केंद्रीय जेलों में ही सजा पूरी करनी पड़ती थी। इसे लेकर लंबे समय से समान अधिकार और सुधारात्मक न्याय की मांग उठती रही है।सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने निर्देशों में स्पष्ट किया है कि महिला कैदियों को पुरुषों के समान अवसर मिलना चाहिए। यदि वे पात्रता की शर्तें पूरी करती हैं, तो उन्हें भी खुली जेलों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। इसी संवैधानिक सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है।
खुली जेल क्या होती है?
खुली जेल एक ऐसी सुधारात्मक व्यवस्था है, जहां चयनित कैदियों को अपेक्षाकृत स्वतंत्र वातावरण में रहने की अनुमति दी जाती है। यहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बजाय आत्मअनुशासन और जिम्मेदारी पर आधारित प्रणाली लागू होती है।कैदी श्रम कार्य कर सकते हैं, आजीविका कमा सकते हैं और सीमित दायरे में पारिवारिक संपर्क बनाए रख सकते हैं। इसका उद्देश्य उन्हें समाज में पुनः स्थापित होने के लिए तैयार करना है।
महिला कैदियों के लिए विशेष प्रावधान
जेल विभाग के अनुसार, महिला कैदियों की सुरक्षा और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए—
- महिला स्टाफ की नियुक्ति
- पृथक आवासीय परिसर
- निगरानी व्यवस्था
- स्वास्थ्य और परामर्श सुविधाएं
- बाल संगोपन संबंधी आवश्यक प्रबंध (जहां लागू हो)
जैसे विशेष प्रावधान किए जाएंगे।
प्रदेश की वर्तमान जेल व्यवस्था
मध्य प्रदेश में वर्तमान में:
- 41 जिला जेल
- 73 उप जेल
- 6 खुली जेल
संचालित हैं। अभी तक खुली जेलों में केवल पुरुष कैदियों को ही रखा जाता था। प्रस्ताव लागू होने के बाद पात्र महिला कैदियों को भी इस व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा।
पुनर्वास को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम महिला कैदियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। खुली जेल में रहने से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और परिवार से जुड़े रहने का अवसर मिलेगा।यह पहल न केवल समान अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि सुधारात्मक न्याय प्रणाली को भी सुदृढ़ करेगी।
आगे की प्रक्रिया
प्रस्ताव फिलहाल शासन स्तर पर विचाराधीन है। मंजूरी मिलने के बाद जेल नियमावली में औपचारिक संशोधन किया जाएगा और पात्रता मानदंड तय कर महिला कैदियों का चयन शुरू होगा।यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो यह मध्य प्रदेश की जेल सुधार नीति में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने वाला निर्णय माना जाएगा।
