जगह-जगह स्वागत,संर्कीतन से गुंजायमान हुई दमोह नगर के गलियां

दमोह,3जनवरी/सनातन धर्म की रक्षा के लिये सिक्ख गुरूओं की लंबी श्रृंखला है जिन्होने जहां मानवता प्रेम का संदेश दिया वहीं सनातन धर्म की रक्षा के लिये अपने प्राणों की आहूतियां दे दी। आज गुरू गोविन्द सिंह की जयंती के उपलक्ष में देश एवं जहां भी सनातन एवं सिक्ख पंथ के अनयाई हैं विविध प्रकार के कार्यक्रम कर रहे हैं। गुरू गोविन्द सिंह की 260 वीं जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश के दमोह नगर में आज 03 जनवरी शनिवार को संर्कीतन के साथ एक भव्य शोभा यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकाली गयी।
गुरु गोबिंद सिंह-
सिक्ख पंथ के गुरु गोबिंद सिंह दसवें एवं अंतिम जीवित गुरुओं में इनको जाना जाता है जो जहां एक ओर दार्शनिक,आघ्यात्मिक थेे तो वहीं एक महान योद्धा भी थे। सनातन धर्म की रक्षा के लिये उन्होने खालसा बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका बतायी जाती है। मात्र 09 वर्ष की आयु में, वे अपने पिता गुरु तेग बहादुर के उत्तराधिकारी बने थे। गोविंद सिंह जी का जीवन बलिदानों से भरा था। उनके चार पुत्रों ने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने मुगलों के अत्याचारों का डटका सामना किया और सनातन धर्म की रक्षा के लिए 14 युद्ध लड़े। उनका प्रमुख उद्देश्य हमेशा धर्म और न्याय की रक्षा करना रहा। बताया जाता है कि गुरु गोविंद सिंह जी ने गुरु ग्रंथ साहिब को सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ और सिखों के अंतिम गुरु के रूप में स्थापित किया। उन्होंने अपने काव्य और ग्रंथों के माध्यम से धर्म, न्याय और वीरता के संदेश दिए। “चंडी दी वार” और “दसम ग्रंथ” उनके प्रसिद्ध साहित्यिक कार्य किये हैं।
खालसा पंथ की स्थापना
गुरू गोविंद सिंह ने सनातन धर्म की रक्षा और अन्याय के खिलाफ लड़ाई के लिए खालसा पंथ की स्थापना की थी। बताया जाता है कि 1699 में बैसाखी के दिन, गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने पांच प्यारे चुने और अमृत छकाकर उन्हें खालसा बनाया। उन्होंने “सिंह” और “कौर” नाम का उपनाम दिया और सिखों को पाँच ककार (केश, कंघा, कड़ा, कृपाण और कच्छा) धारण करने का आदेश दिया। खालसा ने सिखों के बीच एकता और समानता को बढ़ावा दिया था।
दमोह में भव्य शोभायात्रा-
स्थानीय मोरगंज गल्लामंडी में स्थित गुरूद्वारा से प्रारंभ हुई शोभायात्रा में मातृ शक्ति हाथों में झाडू लिये मार्ग को स्वच्छ करने में लगी थीं। पंच प्यारे पारंपरिक भेष भूषा में हाथों में तलवार लिये आगे बढ रहे थे। महिलाओं की टोली पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर संर्कीतन करते हुये चल रही थी। शोभायात्रा स्टेशन चैराहा,तीन गुल्ली,किल्लाई नाका,बस स्टेण्ड,एवरेस्ट तिराहा,घंटाघर,धगट चैराहा होते हुये वापिस गुरू द्वारा पहुंची। लगभग 5 किलोमीटर की इस धार्मिक शोभायात्रा का जगह-जगह भव्य स्वागत किया गया।
अखाडे के माध्यम से शस्त्रों का प्रदर्शन- 
गुरू गोविन्द सिंह जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश के दमोह नगर में निकली भव्य शोभायात्रा में जहां पूरे मार्ग भर पंजाब पटियाला से आये खालसा के सदस्यों ने जमकर प्रदर्शन किया। वहीं नगर के हृदय स्थल घंटाघर पर शस्त्रों का जमकर प्रदर्शन किया। अपने प्रदर्शन से प्रदर्शनकारियों ने उपस्थित विशाल जन समूह को दांतो तले उंगलियां दबाने मजबूर कर दिया।
