“हर वोट-हर निकाय अहम” : पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त आर. परशुराम
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को कहा गया ‘निर्वाचन आयोगों का वर्ल्ड बैंक’
दमोह, 16 फरवरी 2026। मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में निर्वाचन व्यवस्था, लोकतंत्र की मजबूती और स्थानीय निकाय चुनावों की भूमिका पर गहन मंथन हुआ। कार्यक्रम में देश और प्रदेश के पूर्व व वर्तमान निर्वाचन अधिकारियों ने अपने विचार रखते हुए चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और तकनीकी नवाचारों पर जोर दिया।
“बीएलओ से सीईओ तक सभी इलेक्शन कमीशन”
भारत निर्वाचन आयोग के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ.पी. रावत ने “वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) से लेकर चीफ इलेक्शन ऑफिसर तक सभी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि “वन नेशन-वन इलेक्शन” पर चर्चा वर्ष 2015 से प्रारंभ हुई थी और भारत निर्वाचन आयोग ने सिद्धांततः इस पर सहमति व्यक्त की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह व्यवस्था लागू भी होती है, तब भी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका अनिवार्य बनी रहेगी।
रावत ने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (आचार संहिता) की महत्ता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि यह चुनावी निष्पक्षता का मूल आधार है।
“हर वोट है महत्वपूर्ण”
पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त आर. परशुराम ने “स्थानीय निर्वाचन में सुधार की चुनौती” विषय पर बोलते हुए कहा कि अक्सर बुद्धिजीवी वर्ग और मीडिया नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनावों को गंभीरता से नहीं लेते, जबकि लोकतंत्र की जड़ें इन्हीं चुनावों से मजबूत होती हैं।
उन्होंने कहा, “हर वोट-हर निकाय महत्वपूर्ण है। चुनाव, चुनाव होता है—चाहे वह लोकसभा का हो या पंचायत का।”
परशुराम ने चुनावी तैयारी में “प्रिपेयर, प्रिपेयर और प्रिपेयर” के सिद्धांत को अपनाने की बात कही और नवीनतम तकनीकों के उपयोग से न घबराने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग तुलनात्मक रूप से अधिक अधिकार संपन्न और नवाचारों में अग्रणी रहा है।
लोकतंत्र की जमीनी मजबूती पर चर्चा
दैनिक भास्कर स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष नरेन्द्र कुमार सिंह ने “जमीनी लोकतंत्र में पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव” विषय पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने 1952 के प्रथम लोकसभा चुनाव से लेकर वर्तमान तक के चुनावी इतिहास का उल्लेख किया और कहा कि 1977 के चुनावों ने भारतीय मतदाता की जागरूकता और लोकतंत्र में आस्था को सिद्ध किया।
उन्होंने बताया कि ब्रिटेन में 1928 में सभी को मताधिकार मिला, जबकि भारत ने स्वतंत्रता के साथ ही सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार लागू कर लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
न्यायिक दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण
वरिष्ठ अधिवक्ता चेतन सेठ ने “स्थानीय निर्वाचन में न्यायालयीन सबक” विषय पर संविधान को एक जीवंत दस्तावेज बताते हुए निर्वाचन से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और न्यायिक दृष्टिकोण की जानकारी दी।
“म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग है निर्वाचन आयोगों का वर्ल्ड बैंक”
राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि हाल ही में राज्य निर्वाचन आयोगों की बैठक में मध्यप्रदेश को ‘निर्वाचन आयोगों का वर्ल्ड बैंक’ कहा गया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान प्रदेश के मैदानी अधिकारियों, नवाचारों और तकनीकी प्रयोगों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल टेक्नोलॉजी में मध्यप्रदेश अग्रणी रहा है और अधिकारियों ने निष्ठा एवं समर्पण से आयोग के नवाचारों को लागू किया है, जिससे संस्थागत आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है।
ई-बुक और मोबाइल ऐप का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान आयोग की “निर्वाचन साहित्य ई-बुक” का विमोचन एवं “प्रेक्षा मोबाइल ऐप” का शुभारंभ किया गया। उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलेक्टर्स, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दीपक सिंह ने आभार व्यक्त किया।
