जिले की द्वितीय दमयंती व्याख्यान माला सम्पन्न

दमोह ]31 जनवरी /दमोह जिला उनके लिए केवल एक प्रशासनिक पदस्थापना नहीं, बल्कि गहरे भावनात्मक जुड़ाव का केंद्र रहा है। प्रशासनिक रूप से स्वतंत्र प्रभार के रूप में उनकी प्रथम पदस्थापना दमोह में हुई, जहाँ उन्होंने न केवल प्रशासनिक अनुभव अर्जित किए, बल्कि आमजन से आत्मीय संबंध भी स्थापित किए। यह विचार मध्यप्रदेश प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एस.एन. मिश्रा ने पीएमश्री महाविद्यालय दमोह में आयोजित जिले की द्वितीय दमयंती व्याख्यान माला के दौरान व्यक्त किए।
श्री मिश्रा ने कहा कि उनके ढाई वर्ष के कार्यकाल ने यह सिखाया कि प्रशासन जनता से संवाद और सहयोग के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है। शासन का प्रतिनिधि होने के नाते जब जनआकांक्षाओं को समझकर मिल-जुलकर समाधान खोजे जाते हैं, तो वे समाधान अधिक स्थायी और व्यावहारिक होते हैं।
उन्होंने कलेक्टर निवास एवं उसके परिसर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति का निजी निवास नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक संस्था है, जहाँ से अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। 18 एकड़ में फैला कलेक्टर बंगला परिसर एवं बेला ताल क्षेत्र शहर के लिए एक महत्वपूर्ण “ऑक्सीजन बैंक” रहा है, जिसे संरक्षित रखना समृद्ध परंपरा का हिस्सा है।
श्री मिश्रा ने दमोह की सांस्कृतिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महाकौशल और बुंदेलखंड की संयुक्त संस्कृति जिले को विशिष्ट पहचान प्रदान करती है। उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली बताया कि उन्हें इस जिले में कार्य करने का अवसर मिला। साथ ही उन्होंने कहा कि समय के साथ जिले में अधोसंरचना, सुविधाओं एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे शहर जनता की अपेक्षाओं के और अधिक निकट आता जा रहा है।
अपनापन और विश्वास लेकर लौटता था हर व्यक्ति – डॉ. कुसमरिया
मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने श्री मिश्रा के व्यक्तित्व और कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनसे मिलने वाला हर व्यक्ति अपनापन और विश्वास लेकर लौटता था। उन्होंने बताया कि श्री मिश्रा का स्वभाव अत्यंत मधुर, नम्र और आत्मीय था। उनसे मिलने आने वालों का पहले सत्कार होता था, कार्य की चर्चा बाद में होती थी, जिससे सामने वाला व्यक्ति स्वतः ही आश्वस्त और प्रसन्न हो जाता था।
डॉ. कुसमरिया ने कहा कि श्री मिश्रा के व्यवहार से लोगों को यह भरोसा रहता था कि उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान में आयोग अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका अधिकारियों को मार्गदर्शन देने और आमजन को न्याय दिलाने में प्रभावी सिद्ध होगी।
जनसेवा में छोड़ी अमिट छाप – विधायक जयंत मलैया
दमोह विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री जयंत मलैया ने कहा कि जीवन में अनेक लोग मिलते हैं, लेकिन कुछ अपने कार्यों के कारण सदैव स्मरणीय बन जाते हैं। श्री एस.एन. मिश्रा ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने जनसेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए कहा कि उनका अनुभव और समर्पण भविष्य में भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
25 वर्षों बाद भी जीवंत हैं स्मृतियाँ – कलेक्टर कोचर
कलेक्टर श्री सुधीर कुमार कोचर ने कहा कि एस.एन. मिश्रा जैसे अधिकारी विरले होते हैं, जिन्हें कार्यकाल समाप्त होने के वर्षों बाद भी जनता उसी आत्मीयता और सम्मान से याद करती है। उन्होंने बताया कि श्री मिश्रा की विदाई का दृश्य आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है, जब एक खचाखच भरे भवन में जनता ने लगभग एक ट्रक भर फूल-मालाओं से उनका सम्मान किया था।उन्होंने कहा कि किसी शासकीय अधिकारी के लिए इससे बड़ा सम्मान क्या हो सकता है कि उसका आगमन, कार्यकाल और प्रस्थान—तीनों ही जनता के प्रेम और विश्वास से जुड़े हों। यही कारण है कि 25 वर्षों के बाद भी श्री एस.एन. मिश्रा का नाम दमोह की स्मृतियों में जीवंत बना हुआ है।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में पूर्व विधायक अजय टंडन, भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे, भावसिंह मासाब, कांग्रेस जिलाध्यक्ष श्री मानक पटेल, वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र दुबे ने भी अपने विचार एवं स्मृतियाँ साझा कीं।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार महेन्द्र दुबे ने किया तथा आभार प्रदर्शन वरिष्ठ पत्रकार सुनील गौतम ने किया।
आयोजन में प्रबुद्धजन, गणमान्य नागरिक, अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं मीडियाजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
