दमोह। शहर में विकास, अतिक्रमण और सरकारी जमीनों के उपयोग को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। गुरुवार को प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा पथरिया विधायक ने पूर्व वित्त मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया और कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर अनुपयोगी पड़ी शासकीय भूमि और जर्जर भवनों का निरीक्षण किया। इस दौरान इन स्थलों के बेहतर उपयोग को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा भी हुई।
ज्ञात हो कि दमोह नगर में पिछले लगभग तीन दशकों से विकास, अतिक्रमण और फिर नए निर्माण कार्यों को लेकर लगातार बहस होती रही है। शहर में कई बार सड़क चौड़ीकरण, पार्किंग व्यवस्था और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर पुराने ढांचे हटाए गए, लेकिन बाद में वही स्थान दोबारा अतिक्रमण की चपेट में आते रहे। जानकारों का कहना है कि इस “बनाओ और मिटाओ” की राजनीति में वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं।
नगर में जिन स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था विकसित की गई थी, उनमें से अधिकांश स्थानों पर फिर से अतिक्रमण हो गया है। शहर के प्रमुख बाजारों में सड़कों, फुटपाथों और घंटाघर क्षेत्र के आसपास नगर पालिका की दुकानों के कॉरिडोर भी अतिक्रमण की चपेट में दिखाई देते हैं। पुरानी नगर पालिका के क्षेत्र में स्वीकृत दुकानों से अधिक संख्या में दुकानों के निर्माण को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
शहर के सबसे प्राचीन शैक्षणिक संस्थानों में से एक मांगज स्कूल का परिसर भी इन दिनों चर्चा में है। निरीक्षण के दौरान इस स्थान के भविष्य को लेकर नए निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कुछ लोगों का मानना है कि इतने विशाल परिसर का उपयोग कन्या शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक बड़े कन्या विद्यालय के रूप में किया जा सकता है, जबकि अन्य लोग यहां अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण की संभावना देख रहे हैं।
दमोह नगर में वर्तमान में छात्राओं की शिक्षा के लिए महारानी लक्ष्मीबाई विद्यालय और जसवंत लाल प्रहलाद भाई विद्यालय जैसे प्रमुख शासकीय संस्थान संचालित हैं। जानकारों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों की भूमि का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए नहीं होना चाहिए, लेकिन पूर्व में कुछ स्थानों पर दुकानों के निर्माण और उनके विक्रय को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं। इसी प्रकार कभी नगर की शान माने जाने वाले बाल विनोद स्कूल का परिसर भी आज अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहा है।
शहर भ्रमण के दौरान राज्यमंत्री ने कहा कि दमोह में कई ऐसे शासकीय स्थल हैं जिनका वर्तमान में समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। इन स्थानों पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, पार्किंग व्यवस्था, छात्रावास, लाइब्रेरी और अन्य जनसुविधाओं के विकास की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विधायक जयंत मलैया, कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत योजना तैयार की जाएगी और आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि शहर के मध्य स्थित पशु चिकित्सालय लगभग एक एकड़ भूमि पर संचालित हो रहा है, जो शहर का अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यस्त क्षेत्र है। यहां पार्किंग की गंभीर समस्या है। ऐसे में प्रस्ताव है कि इस भूमि पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, व्यवस्थित पार्किंग और अन्य उपयोगी संरचनाएं विकसित की जाएं। इसके लिए हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों से भी चर्चा की जा रही है ताकि सुनियोजित तरीके से विकास कार्य किया जा सके।
वहीं पूर्व वित्त मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया ने कहा कि जिन शासकीय स्थलों की भूमि अव्यवस्थित या अनुपयोगी पड़ी है, उनका बेहतर और जनहितकारी उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि शहर में कुछ पुराने और जर्जर भवन अब उपयोग में नहीं हैं, जबकि विद्यार्थियों की पढ़ाई सुरक्षित भवनों में संचालित हो रही है। ऐसे जर्जर और खाली पड़े भवनों के स्थान पर नई उपयोगी संरचनाओं के निर्माण की योजना बनाई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि स्कूल शिक्षा विभाग को शैक्षणिक संस्थान विकसित करने के उद्देश्य से लगभग छह एकड़ में प्रदान की गई थी। प्रशासन इस भूमि के उद्देश्यपूर्ण उपयोग को लेकर दीर्घकालिक योजना तैयार करेगा।
निरीक्षण के दौरान पशु चिकित्सालय कचोरा मार्केट, नगर पालिका विद्युत कार्यालय परिसर, मांगज स्कूल, बस स्टैंड लोडेड वाहन पार्किंग, महिला वसतीगृह, उत्कृष्ट विद्यालय छात्रावास किल्लाई नाका, दीवान जी की तलैया और मानस भवन सहित कई प्रमुख स्थानों का जायजा लिया गया।प्रशासन का कहना है कि निरीक्षण के बाद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक कर एक समग्र और सुनियोजित रणनीति बनाई जाएगी, ताकि शहर की प्रमुख लोकेशनों का व्यवस्थित विकास हो सके और भविष्य में अतिक्रमण जैसी समस्याएं दोबारा न उत्पन्न हों।
