विशेष रिपोर्ट:
दमोह (मप्र) | 23 फरवरी 2026 मध्य प्रदेश के दमोह जिले में कानून व्यवस्था और पुलिसिया चौकसी पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है। जिले के देहात थाना पुलिस की कस्टडी से 64 वर्षीय एक दिव्यांग बुजुर्ग आरोपी, संतोष पटेल, रविवार तड़के करीब 4 बजे रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया। यह घटना महज एक आरोपी के भागने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे पुलिस की कार्यप्रणाली, बरामदगी में हेराफेरी के आरोप और प्रशासनिक ढुलमुलपन की एक गहरी कहानी नजर आ रही है।
घटनाक्रम:
‘शौच’ बना पुलिस की ढाल? पुलिस थ्योरी के अनुसार, आरोपी संतोष पटेल पर एसपी श्रुतिकीर्ति सोमवंशी ने 2,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। गिरफ्तारी के बाद, रविवार तड़के आरोपी ने दो सुरक्षाकर्मी आरक्षकों से शौच जाने की अनुमति मांगी। पुलिस का दावा है कि वह झांसा देकर थाने के पिछले हिस्से में स्थित खेतों के रास्ते भाग निकला।
सवाल यह उठता है:
क्या दो प्रशिक्षित और हथियारबंद जवानों को एक 64 साल का बुजुर्ग, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग है, चकमा देकर खेतों में दौड़ लगा सकता है?
बरामदगी का ‘खेलरानी’ और फरियादी के गंभीर आरोप-
इस मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट अधिवक्ता और फरियादी रामनारायण गर्ग के आरोपों से आया है। गर्ग का दावा है कि उनके घर से 14 तोला सोना, 7 लाख रुपये नकद और करीब 3 किलो चांदी चोरी हुई थी। पुलिस का दावा: पुलिस ने मशरूका (बरामद माल) के रूप में केवल 5 ग्राम सोना, 10 हजार रुपये नकद और 2 किलो चांदी दिखाई। साजिश का अंदेशा: फरियादी का सीधा आरोप है कि पुलिस ने बरामद माल में बड़ी हेराफेरी की है। इसी ‘घपले’ को दबाने और मामले को रफा-दफा करने के लिए आरोपी को पुलिस कस्टडी से ‘भगाने का नाटक’ रचा गया है। कानूनी शिकंजा और विभागीय कार्रवाई मामला तब और पेचीदा हो गया जब फरियादी ने दमोह पुलिस की कार्यप्रणाली को चुनौती देते हुए IG, DGP, गृह विभाग और हाई कोर्ट तक गुहार लगाई। पुलिस पर बढ़ते दबाव के बीच ही आरोपी की गिरफ्तारी दिखाई गई थी, लेकिन उसके तुरंत बाद ‘फरार’ होने की कहानी ने खाकी की साख पर बट्टा लगा दिया है।
CSP एच.आर. पांडेय का बयान:
”लापरवाही अक्षम्य है। आरोपी की तलाश में तीन टीमें जुटी हैं। जिन पुलिसकर्मियों की निगरानी में यह चूक हुई है, उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एसपी को रिपोर्ट भेजी जा रही है।”
प्रमुख बिंदु जो पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हैं: दिव्यांगता बनाम गति: एक पैर से लाचार व्यक्ति पुलिसिया घेरे को तोड़कर कैसे भाग सकता है? इनाम का टाइमिंग: गिरफ्तारी से ठीक पहले या बाद में इनाम घोषित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुरक्षा में चूक: क्या थाने के पीछे के रास्ते और सुरक्षा घेरा इतना कमजोर था कि कोई भी आसानी से निकल जाए? आकर्षक हेडलाइंस (Options): खाकी की कहानी, दिव्यांग की ‘जुबानी’: दमोह में पुलिस कस्टडी से इनामी फरार, साजिश या संयोग? दमोह पुलिस की ‘मेगा लापरवाही’: बरामदगी में हेराफेरी के आरोपों के बीच दिव्यांग आरोपी गायब! शौच के बहाने ‘सिस्टम’ को चकमा: दमोह देहात थाने से बुजुर्ग आरोपी फरार, उठे संगीन सवाल।
