दमोह कलेक्टर बंगले का गौरवशाली इतिहास जहां रहते थे अंग्रेज अधिकारी

दमोह,2जनवरी/मध्यप्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय पर स्थित कलेक्टर निवास जिसको बंगला के नाम से पहचाना जाता है अपने निर्माण के 100 बर्ष पूर्ण कर चुका है। आजादी के पूर्व बर्ष 1926 में इसका निर्माण हुआ था और इसमें अंग्रेज अधिकारी का निवास हुआ करता था। आज इसमें कलेक्टर निवास है जो कि मध्यप्रदेश के विशाल बंगलों में से इसको भी एक माना जाता है जहां कलेक्टर निवास करते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें किसी प्रकार की छेडछाड नहीं की गयी है वही खिडकी एवं दरवाजों के साथ डिजाइन बनी हुई है जिसमें समय समय पर सिर्फ रंग रोगन किया जाता है। बंगले के 100 बर्ष पूर्ण होने पर इसको रंगीन रोशनी से सजाया गया है जिससे इसकी अनुपम छटा देखते ही बन रही है।
अब तक 45 कलेक्टर-

100 बर्ष अपने निर्माण को पूर्ण कर चुके इस बंगले में जिले के प्रथम कलेक्टर 1954 से 1956 तक इस बंगले में एस.एन.बाबरा का निवास रहा। दमोह जिले में सुधीर कुमार कोचर 45 वंे नंम्बर के कलेक्टर हैं जिनके कार्यकाल में यह बंगला 100 बर्ष का हो गया। बंगले में निवास करने वाले कलेक्टरों में से अनेक नाम वह हैं जो कि उच्च सेवा में भी अपना स्थान बना चुके हैं। विशाल परिसर में स्थित बंगला अपने गौरवशाली इतिहास को लेकर पहचाना जाता है।
बर्ष में होेंगे आयोजन-
कलेक्टर कोचर ने चर्चा के दौरान बताया कि एक बर्ष तक इसको लेकर विविध प्रकार के कार्यक्रम किये जायेंगे। वह बंगले के इतिहास के संबध में जानकारी एकत्रित कर उसके निर्माण के संबध में बोर्ड बंगले के शिखर पर लगाने का श्रेय तत्कालीन कलेक्टर तरूण राठी देते हैं। उन्होने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मेरे कार्यकाल में यह बंगला 100 बर्ष पूर्ण कर रहा है। वह कहते हैं कि एक बर्ष तक विविध प्रकार के आयोजन करने की योजना तैयार की गयी है। जो कलेक्टर बंगले के 100 बर्ष पूर्ण करने से संबधित होगी। डाक टिकिट जारी करने एवं रंगीन रोशनी से सजाने से यह सिलसिला प्रारंभ किया जा चुका है।
