31 जनवरी तक पूर्ण होगी जांच प्रक्रिया, 01 फरवरी को प्रस्तुत होगा समेकित प्रतिवेदन

दमोह/जिले में संचालित शासकीय एवं निजी एंबुलेंस सेवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा एवं निर्धारित मानकों के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार कोचर ने सभी एंबुलेंसों की सघन जांच कराने के निर्देश दिए हैं।कलेक्टर कोचर ने बताया जिले की समस्त शासकीय एवं निजी एंबुलेंसों की परिवहन के परिप्रेक्ष्य में वाहन की तकनीकी स्थिति, फिटनेस एवं सुरक्षा से संबंधित तथा स्वास्थ्यध् चिकित्सकीय परिप्रेक्ष्य में उपलब्ध चिकित्सकीय उपकरणों, संसाधनों एवं सेवाओं की विस्तृत जांच की जाएगी। यह जांच परिशिष्ट-01 एवं 02 में उल्लिखित बिंदुओं के अनुसार की जाएगी। उन्होंने निर्देशित किया कि उक्त समस्त जांच कार्यवाही 31 जनवरी तक अनिवार्य रूप से पूर्ण की जाए। जांच उपरांत 01 फरवरी को समेकित जांच प्रतिवेदन कलेक्ट्रेट कार्यालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
नोडल एवं सहायक नोडल अधिकारियों की नियुक्ति-
कलेक्टर कोचर ने बताया इस संपूर्ण कार्यवाही के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत दमोह प्रवीण फुलपगारे को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। नोडल अधिकारी के सहयोग हेतु जिला परिवहन अधिकारी, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जिला शासकीय चिकित्सालय तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
संयुक्त जांच दल गठित करने की स्वतंत्रता-
उन्होंने बताया मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रवीण फुलपगारे जिला पंचायत दमोह को आवश्यकता अनुसार संयुक्त जांच दल,टीमें गठित करने हेतु पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी। जांच उपरांत संबंधित जांच दल द्वारा नोडल अधिकारी द्वारा निर्धारित प्रारूप में एवं फोटोग्राफ सहित विस्तृत जांच प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा।
परिवहन के परिप्रेक्ष्य में एंबुलेंस की जांच-
निर्देशों के तहत संबंधित एंबुलेंस के वैध पंजीयन प्रमाण-पत्र (आरसी), फिटनेस प्रमाण-पत्र, बीमा प्रमाण-पत्र, परमिटध्अनुज्ञप्ति तथा प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (पीयूसी) की जांच कर उनकी वैधता सुनिश्चित की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि वाहन का पंजीयन एंबुलेंस श्रेणी में ही किया गया हो।जांच के दौरान एंबुलेंस की यांत्रिक एवं सुरक्षा स्थिति का परीक्षण किया जाएगा, जिसमें टायर स्पेयर सहित, ब्रेक, स्टीयरिंग, बैटरी, इंजन आदि की कार्यशीलता शामिल रहेगी। साथ ही वाहन में उपलब्ध सभी प्रकाश एवं संकेतक उपकरणों जैसे हेडलाइट, टेललाइट, इंडिकेटर, रिफ्लेक्टर, सायरन, फ्लैशिंग लाइट एवं हूटर की कार्यशीलता की भी जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त एंबुलेंस में अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता एवं उसकी वैधता, वाहन पर “।डठन्स्।छब्म्” शब्द का स्पष्ट अंकन, निर्धारित रिफ्लेक्टिव स्ट्रिप्स स्टिकर, बाह्य पहचान तथा आंतरिक संरचना का मानक अनुरूप होना सुनिश्चित किया जाएगा। एंबुलेंस चालक के वैध ड्राइविंग लाइसेंस, निर्धारित योग्यता एवं नशामुक्त स्थिति की भी जांच की जाएगी। प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि एंबुलेंस के आंतरिक ढांचे में रोगी परिवहन हेतु सुरक्षित एवं मानक अनुरूप व्यवस्था होना अनिवार्य है। साथ ही मोटरयान अधिनियम, संबंधित नियमों तथा शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत अपेक्षित सभी अन्य बिंदुओं की भी जांच की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की सुरक्षा या मानक संबंधी कमी न रह जाए।
स्वास्थ्य चिकित्सकीय परिप्रेक्ष्य में एंबुलेंस की जॉच-
निर्देशो के तहत एंबुलेंस में उपलब्ध स्ट्रेचर, ऑक्सीजन सिलेंडर भरा हुआ एवं वैधता सहित, ऑक्सीजन मास्क सहित अन्य आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों की उपलब्धता एवं कार्यशीलता की जांच की जाएगी।जॉच के दौरान फर्स्ट एड किट, प्ट स्टैंड, प्ट फ्लूड, ठच् मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर तथा जहां लागू हो वहां ग्लूकोमीटर जैसी आपातकालीन चिकित्सा सामग्री की उपलब्धता और उपयोग योग्य स्थिति का परीक्षण किया जाएगा। संक्रमण नियंत्रण के अंतर्गत डिस्पोजेबल ग्लोव्स, मास्क, हैंड सैनिटाइजर, बायो-मेडिकल वेस्ट बैग की उपलब्धता के साथ-साथ एंबुलेंस की समग्र स्वच्छता एवं नियमित सैनिटाइजेशन की स्थिति सुनिश्चित की जाएगी। एंबुलेंस में तैनात म्डज्ध् पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता जहां लागू हो, एंबुलेंस लॉग-बुक, ड्यूटी रजिस्टर तथा आपातकालीन संपर्क नंबरों के स्पष्ट प्रदर्शन की भी जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त शासन अथवा सक्षम प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर निर्धारित स्वास्थ्य एवं चिकित्सकीय मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अंतर्गत अपेक्षित सभी अन्य बिंदुओं की भी जांच की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी आवश्यक चिकित्सकीय मानक अपूर्ण न रहे।
