मुनि श्री पदम सागर जी के सानिध्य में भव्य आयोजन, 3 मार्च को समापन
दमोह। सकल जैन समाज द्वारा श्री नंदी मंदिर निर्माण कार्यार्थ आयोजित श्री 24 समोशरण अरहंत चक्र महामंडल विधान उमा मिस्त्री की तलैया में श्रद्धा एवं भक्ति भाव से जारी है। विधान के पांचवें दिन मुनि संघ के सानिध्य में 64 रिद्धि मंत्रों के अर्घ्य समर्पित किए गए।
यह आयोजन संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर एवं आचार्य समय सागर की मंगल प्रेरणा व आशीर्वाद से उनके शिष्य मुनि पदम सागर एवं छुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी के सानिध्य में संपन्न हो रहा है। 3 मार्च तक चलने वाले इस भव्य आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
गणमान्यजनों की उपस्थिति
पांचवें दिन पूर्व वित्त मंत्री एवं दमोह विधायक जयंत मलैया, कुंडलपुर कमेटी अध्यक्ष श्री चंद्रकुमार सराफ सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने शामिल होकर मुनिश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रातः बेला में प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी दीपक भैया, सुरेश शास्त्री, अभिषेक शास्त्री सहित अन्य विद्वानों के निर्देशन में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन सम्पन्न हुआ।
अर्घ्य एवं पूजन का सौभाग्य
मुख्य शांतिधारा एवं समोशरण पूजन का सौभाग्य राकेश पुजारी परिवार, आनंद बीएसएनएल परिवार, लोकेश गांगरा परिवार एवं डॉ. सुबोध जैन परिवार को प्राप्त हुआ। रविवार को विमल कुमार जैन (बटियागढ़) परिवार सहित अन्य परिवारों को यह अवसर प्राप्त होगा।
मुख्य समोशरण के साथ 24 गंधकुटियों में 64 रिद्धि मंत्रों के अर्घ्य 24 सौधर्म इंद्र परिवारों एवं इंद्र-इंद्राणियों द्वारा महापत्रों के साथ समर्पित किए गए। भगवान आदिनाथ से शीतलनाथ तक 10 पूजन सम्पन्न हुईं। छठवें दिन भगवान श्रेयांशनाथ से भगवान महावीर तक 14 पूजन के साथ अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे।
‘मुकमाटी’ का अरबी अनुवाद
विधान अवसर पर उज्जैन से पधारे भट्टारक जी ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागर जी की अनमोल कृति मुकमाटी का अरबी भाषा में रूपांतरण किया गया है। अब तक यह ग्रंथ 17 भाषाओं में अनूदित हो चुका है। अगले माह दुबई में इसके अरबी संस्करण को लेकर सेमिनार आयोजित होगी। नेपाली भाषा में भी ग्रंथ के रूपांतरण की जानकारी दी गई।
मंदिर निर्माण हेतु दान घोषणाएं
विधान के दौरान विभिन्न मंदिरों एवं समाजजनों द्वारा द्रव्य सामग्री एवं राशि समर्पित की गई। सिविल वार्ड भाईजी मंदिर के आसामियों ने दो लाख रुपये की नगद राशि नन्हे मंदिर निर्माण हेतु प्रदान की। मलैया मील मंदिर एवं पलंदी मंदिर समिति द्वारा भी सहयोग राशि की घोषणा की गई।
मुनि श्री पदम सागर जी की प्रेरणा से अनेक श्रावक परिवारों ने 24 मूर्ति स्थापना एवं ग्यारह-ग्यारह कलश दान की घोषणाएं कीं। मंदिर के स्तंभ, मंडप एवं निर्माण सामग्री हेतु भी दानदाताओं ने उदार सहयोग की घोषणा की।
समवशरण की महिमा पर प्रवचन
अवसर पर मुनि श्री पदम सागर जी महाराज ने भगवान के समवशरण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि समवशरण में बैठने का सौभाग्य पुण्यशाली जीवों को ही मिलता है। उन्होंने भगवान महावीर के समवशरण प्रसंग, गौतम स्वामी की दीक्षा एवं पात्रता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुनिश्री ने कहा कि बिना पात्रता के दान-पूजन भी निष्फल है। उन्होंने समाजजनों से 3 मार्च को निकलने वाली श्रीजी की विमान शोभायात्रा को ऐतिहासिक स्वरूप देने का आह्वान करते हुए युवा वर्ग एवं बालिकाओं से विशेष सहभागिता का आग्रह किया।
