दमोह,04 March/जिले के ऐतिहासिक कलेक्टर भवन निवास ने अपने 100 वर्ष पूर्ण कर लिए। इस विशेष अवसर पर कलेक्टर बंगले परिसर में भव्य होली महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसने प्रशासनिक इतिहास, सांस्कृतिक परंपरा और जनसरोकारों को एक साथ जोड़ दिया। शताब्दी वर्ष के इस समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, प्रबुद्ध नागरिकों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।इस आयोजन का नेतृत्व जिले के कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने किया। उन्होंने इस अवसर को केवल उत्सव नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विरासत के सम्मान और जनसेवा के संकल्प का प्रतीक बताया।
सौ वर्षों की प्रशासनिक यात्रा का साक्षी भवन
कलेक्टर भवन केवल एक आवासीय परिसर नहीं, बल्कि जिले के प्रशासनिक इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। बीते एक शताब्दी में इस भवन ने अनेक कलेक्टरों को आते-जाते देखा है, बदलते समय, नीतियों और सामाजिक परिस्थितियों का साक्षी बना है।वर्तमान में इस भवन में निवास कर रहे कलेक्टर कोचर 44वें कलेक्टर हैं। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि यह भवन अधिकार का नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व का प्रतीक है। इसकी भव्यता और ऐतिहासिक गरिमा हर दिन यह स्मरण कराती है कि प्रशासन का मूल उद्देश्य जनता की सेवा है।
उन्होंने कहा—
“यह भवन जितना भव्य दिखाई देता है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी का अहसास भी कराता है। यहां निवास करना गौरव का विषय है, लेकिन उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है जनता के विश्वास पर खरा उतरना।”
होली के रंगों में घुली प्रशासनिक समरसता
शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित होली महोत्सव ने कार्यक्रम को विशेष रंग दे दिया। कलेक्टर बंगले का परिसर गुलाल और अबीर से रंगमय हो उठा। ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक लोकधुनों और हंसी-ठिठोली के बीच सभी ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में एक-दूसरे को रंग लगाया।प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रमुख, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता एक साथ होली खेलते नजर आए। इस अवसर पर किसी प्रकार की औपचारिकता का भाव नहीं था, बल्कि अपनत्व और समरसता का वातावरण प्रमुख रहा।यह दृश्य प्रशासन और समाज के बीच बढ़ते विश्वास और संवाद का प्रतीक बन गया।
विरासत संरक्षण पर भी हुआ मंथन
कार्यक्रम के दौरान ऐतिहासिक भवन के संरक्षण और रख-रखाव पर भी चर्चा हुई। शताब्दी वर्ष के अवसर पर भवन की ऐतिहासिक विशेषताओं, स्थापत्य शैली और पुरातन स्वरूप को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया।कलेक्टर कोचर ने कहा कि ऐसे भवन केवल ईंट-पत्थर की संरचना नहीं होते, बल्कि वे इतिहास, परंपरा और प्रशासनिक संस्कृति की पहचान होते हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को सुरक्षित रखना सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रशासन और जनता के बीच सेतु का प्रतीक
इस आयोजन ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि शासन और समाज के बीच की दूरी को संवाद और सहभागिता के माध्यम से कम किया जा सकता है। कलेक्टर बंगले का शताब्दी उत्सव इस बात का उदाहरण बना कि प्रशासन केवल आदेश देने वाली व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाली संस्था है।होली के रंगों के बीच यह संदेश भी स्पष्ट हुआ कि जिम्मेदारी, पारदर्शिता और सेवा भाव ही प्रशासन की असली पहचान है।
शताब्दी वर्ष बना यादगार
कलेक्टर भवन के 100 वर्ष पूरे होने का यह आयोजन जिले के इतिहास में एक यादगार अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। रंगों की उमंग, ऐतिहासिक विरासत का सम्मान और जनसेवा का संकल्प—इन तीनों का संगम इस समारोह की विशेषता रहा।दमोह में यह आयोजन केवल होली का उत्सव नहीं, बल्कि एक सदी की प्रशासनिक यात्रा का उत्सव बन गया।
