2000 से अधिक विद्यार्थियों को उपाधियाँ, 17 मेधावियों को स्वर्ण पदक; मुख्य अतिथि ओम बिरला का प्रेरक संबोधन

इंदौर /शिक्षा, संस्कार और उत्कृष्टता की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय का आठवाँ दीक्षांत समारोह शुक्रवार को अत्यंत गरिमामय एवं भव्य वातावरण में सम्पन्न हुआ। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक आयाम प्रदान किया।समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी तथा मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट की उपस्थिति रही। मंच पर विश्वविद्यालय प्रशासन एवं न्यास समूह के पदाधिकारियों की गरिमामयी मौजूदगी ने आयोजन की शोभा बढ़ाई।
2000 से अधिक विद्यार्थियों को मिली उपाधि
दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के 2000 से अधिक विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की उपाधियाँ प्रदान की गईं। पारंपरिक परिधान में सुसज्जित विद्यार्थियों ने जब मंच पर जाकर उपाधि प्राप्त की, तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।शैक्षणिक उत्कृष्टता और समग्र प्रदर्शन के आधार पर 17 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इन विद्यार्थियों ने अपने परिश्रम, अनुशासन और समर्पण से विश्वविद्यालय का नाम गौरवान्वित किया।अभिभावकों के लिए यह क्षण भावनात्मक और गर्व से परिपूर्ण था। अनेक अभिभावक अपने बच्चों की सफलता के साक्षी बनकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।
मुख्य अतिथि का प्रेरक उद्बोधन
मुख्य अतिथि ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि लगभग 142 वर्षों से श्री वैष्णव न्यास समूह द्वारा शिक्षा, सेवा और संस्कार के क्षेत्र में किया जा रहा कार्य अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों और सामाजिक दायित्वों से युक्त नागरिक तैयार करने का सशक्त मंच है।उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने कहा कि आज का युवा आत्मनिर्भर, नवाचारी और तकनीकी रूप से दक्ष है, जो ‘विकसित भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
विशिष्ट अतिथियों के विचार
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि इंदौर शिक्षा और नवाचार का प्रमुख केंद्र बन चुका है और श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय ने इस पहचान को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।मंत्री तुलसी सिलावट ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा भी देती है। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
वार्षिक प्रतिवेदन में उपलब्धियों का उल्लेख
समारोह का औपचारिक उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री पुरुषोत्तम दास पसारी द्वारा किया गया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. योगेश चंद्र गोस्वामी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए वर्षभर की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान परियोजनाओं, नवाचार गतिविधियों, उद्योग–अकादमिक सहयोग, प्लेसमेंट उपलब्धियों तथा संस्थागत विस्तार का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने गुणवत्ता आधारित शिक्षा, अनुसंधान प्रोत्साहन, स्टार्टअप संस्कृति और कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपलब्धियों ने संस्थान की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है।
अनुशासन और गरिमा का उदाहरण बना समारोह
पूरे आयोजन में सुव्यवस्थित व्यवस्थाएँ, सुसज्जित सभागार, पारंपरिक दीक्षांत वेशभूषा और सांस्कृतिक गरिमा देखने को मिली। कार्यक्रम का संचालन शालीनता और अनुशासन के साथ किया गया।समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।यह आठवाँ दीक्षांत समारोह विश्वविद्यालय के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ। शिक्षा, संस्कार और उत्कृष्टता के मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ते हुए श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
