दमोह में महर्षि विद्या मंदिर की रजत जयंती : शिक्षा, संस्कार और अध्यात्म का 25 वर्षों का ऐतिहासिक उत्सव

दमोह,4 Feb/मध्य प्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय पर स्थापित महर्षि विद्या मंदिर ने शिक्षा, संस्कार और अध्यात्म के क्षेत्र में अपने 25 वर्ष पूर्ण कर लिए। इस गौरवशाली उपलब्धि के उपलक्ष्य में विद्यालय परिसर में रजत जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जो न केवल एक शैक्षणिक समारोह रहा बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और वैदिक परंपरा का उत्सव भी बना।
इस विशेष अवसर पर महर्षि विद्या मंदिर के चेयरमैन वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी गिरीश मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं, अभिभावक एवं शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
देव जागेश्वर नाथ की नगरी में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव
दमोह आगमन पर ब्रह्मचारी गिरीश ने कहा कि दमोह देव जागेश्वर नाथ भगवान की पावन नगरी है, जहां कदम रखते ही आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भगवान जागेश्वर नाथ का आशीर्वाद सदैव महर्षि महेश योगी, उनके परिवार और समस्त मानव समाज पर बना हुआ है।
उन्होंने इसे सौभाग्य की बात बताया कि महर्षि विद्या मंदिर जैसी संस्था इस पावन भूमि पर शिक्षा के साथ संस्कारों का भी संवर्धन कर रही है।
महर्षि महेश योगी : भारत की आत्मा को विश्व तक पहुंचाने वाले महापुरुष
अपने उद्बोधन में ब्रह्मचारी गिरीश ने महर्षि महेश योगी के जीवन दर्शन और वैश्विक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि महर्षि जी ने अपने जीवनकाल में 124 देशों की यात्रा कर भारतीय वैदिक ज्ञान, ध्यान और अध्यात्म का संदेश विश्वभर में फैलाया।
उनके प्रयासों से देश-विदेश में विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, विद्यापीठ, वेद विज्ञान संस्थान, आयुर्वेद, ज्योतिष एवं आध्यात्मिक संस्थाओं की स्थापना हुई, जहां आज लाखों विद्यार्थी शिक्षा और संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।
भावातीत ध्यान : विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की कुंजी
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि महर्षि विद्या मंदिर की विशेषता यह है कि यहां आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कृत और भावातीत ध्यान को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है।
विद्यालय में बच्चों को प्रवेश और प्रस्थान के समय प्रतिदिन 15 से 20 मिनट तक भावातीत ध्यान कराया जाता है, जिससे बच्चों में एकाग्रता, स्मरण शक्ति, मानसिक शांति और आत्मविश्वास का विकास होता है।
उन्होंने कहा, “भावातीत ध्यान ज्ञान की सर्वोत्तम पद्धति है, जिसे स्वयं महर्षि महेश योगी ने विकसित किया। यह केवल ध्यान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।”
जीवन का उद्देश्य : आनंद, सुख और संपन्नता
महर्षि महेश योगी के संदेश को साझा करते हुए ब्रह्मचारी गिरीश ने कहा,
“जीवन दुख, संघर्ष या स्ट्रगल के लिए नहीं बना है। जीवन आनंद के लिए है। इसे आनंद के साथ जीना चाहिए। जीवन सुख और संपन्नता के लिए है।”
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति सुबह और शाम कुछ समय अध्यात्म, ध्यान और आत्मचिंतन के लिए निकाले, तो उसका जीवन स्वतः ही आदर्श बन सकता है।
अध्यात्म से ही मनुष्य में अद्भुत परिवर्तन होता है और आदि देव की प्राप्ति संभव होती है, जिससे जीवन संतुलित, शांत और उद्देश्यपूर्ण बनता है।
25 वर्षों की यात्रा : शिक्षा के साथ संस्कारों की मजबूत नींव
महर्षि विद्या मंदिर की 25 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह संस्था केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने समाज को संस्कारवान, अनुशासित और आत्मनिर्भर नागरिक देने का कार्य किया है।
विद्यालय ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली को भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा से जोड़कर एक अनूठा शैक्षणिक मॉडल प्रस्तुत किया है।
रजत जयंती महोत्सव : प्रेरणा और संकल्प का अवसर
रजत जयंती महोत्सव के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रेरणादायी संबोधनों और वैदिक वातावरण ने सभी को भावविभोर कर दिया। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश छोड़ गया कि
“आधुनिकता और अध्यात्म का संतुलन ही सशक्त, शांत और समृद्ध समाज का आधार है।”
