विशेष रिपोर्ट

दमोह 30 जनवरी 2026/गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को जिला न्यायालय दमोह और जिला जेल दमोह को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया था। यह धमकी जिला न्यायालय को भेजे गए एक पत्र के माध्यम से दी गई थी, जिसे जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल उच्च न्यायालय को अवगत कराया। उच्च न्यायालय की निगरानी में एटीएस एवं अन्य गोपनीय एजेंसियों द्वारा धमकी भरे पत्र की जांच शुरू की गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी कार्रवाई गोपनीय रखी गई, जिससे किसी प्रकार की अफवाह या दहशत की स्थिति न बने। साथ ही गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व को ध्यान में रखते हुए बम निरोधक दस्ता भी अलर्ट मोड पर रखा गया। इसी दौरान 24 और 25 जनवरी को हाईकोर्ट के पोर्टफोलियो जज न्यायमूर्ति राजेन्द्र कुमार वाणी का जिला न्यायालय दमोह का दौरा प्रस्तावित था, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया गया और न्यायालय परिसर में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। हालांकि 26 जनवरी का दिन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या स्थिति निर्मित नहीं हुई। कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर एवं पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि जांच में सामने आया है कि धमकी भरा पत्र पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति द्वारा भेजा गया था, जिसकी पहचान ‘रॉय’ नामक युवक के रूप में हुई है। संबंधित युवक मानसिक रूप से विक्षिप्त है और इस तरह की गतिविधियों में पूर्व में भी शामिल रहा है। पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उसे हिरासत में ले लिया गया है। पत्र में युवक ने स्वयं को अत्यंत गरीब बताते हुए यह दावा किया था कि 26 जनवरी को जिला न्यायालय दमोह एवं जिला जेल को बम से उड़ा दिया जाएगा। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि इसी प्रकार के धमकी भरे पत्र प्रदेश के अन्य जिला न्यायालयों को भी भेजे गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और आमजन को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और न्यायिक अधिकारियों की सूझबूझ से समय रहते पूरे मामले का निराकरण किया गया।
