पेड़-खंभे हटे, टेंडर हुआ फिर भी शहरवासी इंतजार में
दमोह। नगर की बहुप्रतीक्षित मॉडल रोड परियोजना पिछले पांच वर्षों से अधर में लटकी हुई है। वर्ष 2021 में विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत इस सड़क को मॉडल रोड के रूप में विकसित करने की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन आज तक यह योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी। इस परियोजना के तहत जबलपुर नाका से जटाशंकर चैराहा तक सड़क निर्माण होना था। काम को दो चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई थी। प्रस्ताव में चैड़ी सड़क, डिवाइडर, बिजली खंभों की शिफ्टिंग, 50 आकर्षक हाईमास्ट, लाइट, फुटपाथ सहित अन्य सौंदर्यीकरण कार्य शामिल थे।
खंभे हटे, पेड़ कटे, फिर भी सड़क अधूरी-
परियोजना की शुरुआत के लिए बिजली के खंभे शिफ्ट करने पर लगभग 28 लाख रुपए खर्च किए गए। इसके अलावा नगर पालिका द्वारा मुख्य मार्ग से 39 पेड़ों को हटाया गया, जिनमें 14 सागौन और 3 बड़े इमली के पेड़ शामिल थे, ताकि सड़क चैड़ी की जा सके।
भुगतान बना सबसे बड़ी बाधा
वर्ष 2022 में सड़क निर्माण के लिए 1 करोड़ 92 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई और ठेका भी आवंटित किया गया। ठेकेदार ने पहले चरण में करीब आधा किलोमीटर सड़क का कार्य शुरू किया, लेकिन पोल शिफ्टिंग, पेड़ हटाने और भुगतान में देरी के चलते काम बार-बार रुकता चला गया। वर्ष 2024 में भुगतान नहीं होने के कारण ठेकेदार ने कार्य पूरी तरह बंद कर दिया, जिससे परियोजना फिर ठंडे बस्ते में चली गई।
मुख्य मार्ग पर रोज जाम से लोग परेशान
यह मार्ग शहर का मुख्य और अत्यंत व्यस्त रास्ता है। प्रतिदिन यहां से सैकड़ों बसें, वाहन और राहगीर गुजरते हैं। सड़क संकरी होने के कारण कोतवाली से लेकर जबलपुर नाका तक आए दिन जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे आमजन को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। नगरपालिका का दावा है कि भुगतान हो चुका, जल्द शुरू हो जायेगा। नगरपालिका दमोह के सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी की माने तो “ठेकेदार के सभी लंबित भुगतान कर दिए गए हैं। काम शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। यदि एक सप्ताह के भीतर कार्य प्रारंभ नहीं होता है, तो ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ी तो उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा।”
अब सवाल,कब बनेगी मॉडल रोड?
लगातार बदलते टेंडर, बढ़ती लागत और भुगतान संबंधी अड़चनों के कारण दमोह की मॉडल रोड सिर्फ वादों तक सीमित रह गई है। अब देखना यह होगा कि नगर पालिका के निर्देशों के बाद काम वास्तव में शुरू होता है या शहरवासी यूं ही इंतजार करते रहेंगे।
