गुप्त नवरात्री, माघ शुक्ल प्रतिपदा से सप्तमी पर्यन्त
दमोह। यह सर्व विदित है कि काशी सभी तीर्थो का सिरमौर्य है जहाँ वैदिक धर्म की ध्वजा सदा से यज्ञीय विधान के परम्परागत सिद्धान्त को अंगीकृत किये शोभाय मान है। यज्ञ सारे विश्व की नाभी है जैसा कि यज्ञ मींमासा का वचन प्रगीत है सो प्रकृति के दैवीय गुणो की रक्षा हेतु मानव को सन्मार्ग पर चलाती है इस विधा को आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना का अग्ररुप ज्ञानकर आप भी इस के सहभागी बनें। श्री भगवान ने यज्ञ के मध्य विष्णु गायत्री कहीं ॐ नारायणाय विद्मेह, वासुदेवा धीमहि तन्नो विष्णुः प्रयोदयात्। जो विविध मंत्रों का केंद्र हैं वैचारिक पृष्ठ भूमिका सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ विष्णु महापुराण है जिसके श्रवण की विधि 18 पुराणों में सबसे लघु है और लाभ चौगुना ऐसा प्रतीत होता है कि व्यास जी ने जिस समय विविध शास्त्रो के माध्यम से साधक को ईश्वर प्राप्ति की पद्धति से परिचय कराया तब सृष्टि के उद्गम मे अणो अणीयान-महतो महियान का सूत्र भी जनाया/बताया, इसमे विराट की लीला विष्णु के वामन अवतार मे देखी गई कालान्तर मे शिवा का शिव से विष्णु लीला श्रवण करने का मनोहारी भाव सामने आया जहाँ हरिहर की एकात्मता दृष्टि गोचार होती है इसी भाव को काशी मे प्रथम बार आप लक्ष्मी नारायण महायज्ञ मे श्रवण करेगें। जिसमें दार्शनिक भावों के अनुभवों का चिंतन प्रवाह आप को सत्संग के रूप में समाहित होगा। कथा समय शाम 5 बजे से शाम 7 बजे तक यज्ञ कलश यात्रा् 19 जनवरी 2026 अरणी मंथन एवं गणेश पूजन, पंचाग पूजन, मण्डप प्रवेश 19 जनवरी 2026 यज्ञीय विधि प्रतिदिन पूजन एवं हवन यज्ञ पूर्णाहुति और भण्डारा 25 जनवरी 2026 यज्ञ नारायण सेवा समिति-वाराणसी।
