पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि पर प्रभाव; सूतक प्रातः 6:30 बजे से
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, मंगलवार दिनांक 3 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण घटित होगा। यह ग्रहण विदेशों तथा भारत के कुछ पूर्वी क्षेत्रों में खग्रास (पूर्ण) रूप में दिखाई देगा, जबकि भारत में यह ग्रस्तोदय स्वरूप में दृश्य होगा।ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि पर घटित हो रहा है। ज्योतिष मतानुसार पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र, सिंह राशि और सिंह लग्न वालों के लिए यह ग्रहण विशेष सावधानी की दृष्टि से देखा जा रहा है।
सूतक काल और ग्रहण की समय-सारणी
भारत में ग्रहण का प्रारंभ चंद्रोदय काल से मान्य होगा। ग्रहण का सूतक चंद्रोदय से 12 घंटे पूर्व प्रारंभ हो जाएगा।
सूतक प्रारंभ: प्रातः 6:30 बजे
उपछाया प्रवेश: दोपहर 2:13 बजे
ग्रहण स्पर्श: दोपहर 3:20 बजे
ग्रहण प्रारंभ (मुख्य चरण): दोपहर 4:35 बजे
ग्रहण मध्य: सायं 5:04 बजे
ग्रहण समाप्त: सायं 6:47 बजे
उपछाया अंत: सायं 7:55 बजे
ग्रहण अवधि (पर्व काल): 3 घंटे 27 मिनट
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में पूजा-पाठ, शुभ कार्य, भोजन पकाना आदि वर्जित माने जाते हैं। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण का राशिफल (सामान्य ज्योतिषीय संकेत)
■ मेष: व्यय की अधिकता, मानसिक परेशानी, चिंता
■ वृष: कार्य सिद्धि, धन लाभ, किंतु शारीरिक कष्ट संभव
■ मिथुन: प्रगति, उत्साह, आर्थिक लाभ
■ कर्क: धनहानि, अपव्यय, कष्ट
■ सिंह: शारीरिक कष्ट, चोट या धनहानि की आशंका
■ कन्या: धनहानि, पीड़ा, अपव्यय
■ तुला: धन लाभ, सुखद परिणाम
■ वृश्चिक: रोग, चिंता, संघर्ष
■ धनु: संतान पक्ष में चिंता, अपयश की संभावना
■ मकर: शत्रु व दुर्घटना भय, अधिक व्यय
■ कुंभ: जीवनसाथी को कष्ट
■ मीन: रोग, गुप्त चिंता, कार्य में रुकावट
ज्योतिषाचार्य आचार्य पं. नारायण वैष्णव 83190-29304 & 99267-48588
(सुदामानगर, महावीर गेट, इंदौर) के अनुसार श्रद्धालुओं को ग्रहण काल में मंत्र जाप, दान और ईश्वर स्मरण करना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान करना शुभ फलदायक माना गया है।
